वेदों में है सनहार्वेस्टर की धारणा

सुधीर राघव 

उस दैविक सभ्यता को समझने के लिए, जिसका जिक्र वेदों में है हमें ऊर्जा क्रांति की जरूरत है। जिस तेजी से साइंस तरक्की कर रही है, उससे लगता है कि अगली सदी तक हम यह क्रांति कर चुके होंगे। अभी तक हम जो भी ऊर्जा के साधन या ईंधन इस्तेमाल करते हैं, वे स्वयं ऊर्जा के सैकेंड, थर्ड कंज्यूमर या उनके अवशेष हैं। जबकि वह सभ्यता सूर्य जैसे तारों की ऊर्जा का सीधा इस्तेमाल करती थी। इसके काफी अच्छे संकेत हमें वेदों में मिलते हैं।
दूसरी ओर हमारी सभ्यता ऊर्जा संग्रहण के मामले में अभी अलजेंडरो वोल्ट के उसी सिद्धांत से ज्यादा आगे नहीं बढ़ पायी है, जिससे बेटरियों का निर्माण शुरू हुआ। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल और संग्रहण का जो आयडिया हमारे पास है, वह भी दोयम दर्जे का है। उसमें भी हम रिफ्लेक्शन के जरिए उष्मा ऊर्जा में बदलते हैं और फिर उसे विद्युत ऊर्जा में बदलकर इस्तेमाल में लाते हैं। इस काम में हम सूर्य की जितनी ऊर्जा को रिफलेक्ट करते हैं उसका बहुत ही कम हिस्सा ऊष्मा में बदल पाता है और उसके बाद विद्युत ऊर्जा में भी वह सारा हिस्सा नहीं बदलता। इस तरह हम बहुत कम हिस्से को ही अपने लिए उपयोगी बना पाते हैं। दूसरी ओर प्रकृति में बेहद सटीक सिस्टम का उदाहरण हमारे सामने है, जिसके जरिए सूरज की ऊर्जा से धरती पर पूरा जीवन चल रहा है। जिन्होंने जीवन की इकाइयां यहां बसाईं वे जानते थे कि ऊर्जा का दोहन किस तरह करना है। यह प्रक्रिया है फोटो सिंथेसिस। धरती का पूरा जीवनचक्र अपनी ऊर्जा की आपूर्ति के लिए इसी पर टिका हुआ है। पौधे क्लोरोफिल की सहायता से सूर्य से आ रही ऊर्जा को पानी और कार्बनडाइऑक्साइड की मदद से न्यूट्रीयेंट में बदल देते हैं। फिर न्यूट्रीयेंट (पौषक तत्व) के जरिए सूर्य की वही ऊर्जा पौधों से अन्य प्राणियों में जाती है। जब हिरण पौधे खाता है तो यह ऊर्जा उसमें जाती है और उसे जीवित रखती है। हिरण को जब शेर खाता है तो सूर्य की वही ऊर्जा हिरण से शेर में ट्रांसफर होती है। इस तरह फूड चैन के जरिए हम सब सूर्य की ऊर्जा से चल रहे हैं।
इसके विपरीत हम अब तक सौर ऊर्जा को संरक्षित करने की कोई इतनी प्रभावशाली बैटरी या तकनीक नहीं निकाल पाये जितनी फोटोसिंथेसिस है। पर अगली सदी ऊर्जा क्रांति की ही है। भविष्य में हम तारामंडलों के बीच सफर करने लायक हो जाएंगे, सर स्टीफन हॉकिंग का कहना है कि यह तभी संभव होगा जब हम करीब प्रकाश के आसपास की गति पा लें। 
मगर इसके लिए हमें ऐसे अंतरिक्ष यान बनाने होंगे, जो सन हार्वेस्टर हों। वेदों में जिन्हें अश्व कह कर संबोधित किया गया है असल में वे ऐसे ही अंतरिक्षयान थे जो सनहार्वेस्टर थे। वेदों में इसलिए इन अश्वों को सूर्य से उत्पन्न बताया गया है। ऐसा जिक्र अनेक बार आया है। ऐसा ही एक उदाहरण हम यजुर्वेद के उन्नतीसवें अध्याय के पांचवें मंत्र में भी देख सकते हैं।
त्रीणि त ऽ आहुदिंवि बंन्धनार्नि त्रोण्यप्सु त्रीण्यन्तः समुद्रे। 
उतेव में वरुणश्छन्त्स्यर्दन्यत्रा त ऽ आहुः परमं जनित्रम॥५॥ (एकोनत्रिंशोऽध्यायः, यजुर्वेद)
अर्थ - (हे अश्व!) तुम्हारा श्रेष्ठ उत्पादक सूर्य बताया गया है तथा स्वर्ग में तुम्हारे तीन बंधन बताए गए हैं, अंतरिक्ष में भी तीन बंधन बताए गए हैं और वरुण रूप से तुम मेरी प्रशस्ति करते हो।

इस मंत्र से स्पष्ट होता है कि अश्व, वास्तव में सनहार्वेस्टर ही थे। इनके तीन बंधन स्वर्ग का अर्थ है कि स्पेस स्टेशन से यह तीन जगह और तीन अन्य जगह से इसे कंट्रोल किया जाता होगा। धरती पर बसने वालों की यह वरुण देव से सीधा संपर्क भी करता होगा।
(क्रमशः)

Comments

ZEAL said…
very informative post Sudheer ji . Thanks.
:) bas yahi kahoogin ki garv hota hai ki yah baaten hamare ved puranon ka hissa hain.... hamre desh ki sanskriti se judi hai.... inhen sajha kar ap bhaut logon ki galatfahmiyan door kar rahe hain...aabhar
( hindi nahin likh pa rahi hun..mafi chahati hun...)
इस आलेख को पढ़कर काफ़ी जानकारी मिली।
अच्छी जानकारी है... किन्तु एक बात और रखना चाहूंगी .. योगी पुरुष आध्यात्म और योग के द्वारा सूर्य की ऊर्जा/उष्मा को अपने शरीर में निहित चक्रों के द्वारा आवश्यकतानुसार ले या दे सकता है ...जिसका उपयोग कुछ लोग मरीज के शरीर में शक्ति का वहाँ करने के लिए करते हैं..
सुधीर said…
@डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति
धरती पर जीवों के बीच ही सूर्य की ऊर्जा का लेनदेन लगातार चलता रहता है। पर सवाल यह है कि सूर्य से प्रति सैकेंड जितनी ऊर्जा धरती पर पहुंचती है उसका बहुत ही नगण्य इस्तेमाल हम कृतिमरूप से कर पाते हैं। इसके लिए ही हमें ऐसी ऊर्जा क्रांति की जरूरत है जो सूर्य की अपार शक्ति को इस्तेमाल के लायक बना दे और हम अन्य कार्बनिक इंधनों पर निर्भर न रहें।
veerubhai said…
Sun Harvesting /Sun Harvester यानी सूरज की खेती एक मर्तबा रोमन लिपि यानी अंग्रेजी में ज़रूर लिख दें .वेदों के ज्ञान को आप सर्व ज्ञान विश्व -ज्ञान ,विज्ञान से जन भाषा में बड़े रसीले ढंग से पिरो रहें हैं .ना -मुमकिन कुछ नहीं है ,आप विज्ञानिक व्याख्या कर रहें हैं जो एक कट्टर आर्य समाजी नहीं कर पाता वह यह कह के चुप हो जाता है वेदों में सब कुछ बता दिया गया है .क्यों या कैसे से भाग जाता है .यह कमी आप तार्किक व्याख्या के ज़रिए पूरी कर रहें हैं .बधाई .कृपया यहाँ भी पधारें -http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/ और यहाँ भी सुधीर भाई ,http://sb.samwaad.com/
सुधीर said…
वीरू भाई जी की टिप्पणी से मुझे लगा कि सन हार्वेस्टर को भी लेख में स्पष्ट करना चहिए था, हालांकि शाब्दिक अर्थ वीरूभाई जी ने दिया है मगर असल में इस शब्द का प्रयोग सर स्टीफन हॉकिंग ने अपनी नई किताब में किया है। सर आईंस्टाइन के सिद्धांत से उत्पन्न संभावना कालयात्रा के संबंध में वे कहते हैं कि हमारे यान प्रकाश के वेग से चलने वाले हो सकते हैं मगर उसके लिए हमें अत्याधिक ऊर्जा की आवश्यक्ता होगी और इतनी ऊर्जा हमें सूरज जैसे तारों से ही लेनी होगी। इस ऊर्जा से चलने वाले भविष्य के यानों को ही उन्होंने सनहार्वेस्टर का नाम दिया है। यह शब्द उनकी ही देन है।
Babli said…
बहुत बढ़िया, महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हुई! धन्यवाद!
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veerubhai said…
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veerubhai said…
सुधीर भाई ,सूरज की खेती और प्रकाश्वेगीय विमानों की अवधारणा के जनक स्टीवन्स हाकिंग्स हमारे दौर के विज्ञान -पितामह हैं .आभार आपका इस जानकारी के लिए "सन -हार्वेस्टर यानी प्रकास्वेगीय पुष्पक . पधारें .Super food :Beetroots are known to enhance physical strength,say cheers to Beet root juice.Experts suggests that consuming this humble juice could help people enjoy a more active life .(Source: Bombay Times ,Variety).

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2011/08/blog-post_07.html
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शुक्रवार, ५ अगस्त २०११
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Kunwar Kusumesh said…
बहुत ज्ञानवर्धक है आपकी पोस्ट ,सुधीर भाई.
आभार.
adbhut jaankaaria ,laabhkaari post ,
Dorothy said…
ज्ञानवर्धक आलेख...स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...
सादर,
डोरोथी.
Babli said…
आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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इस लेख के साथ -२ आज पिछले लेख भी पढ़े! आपके के ज्ञान को नमन है!

आप को श्री कृष्णजन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!
बहुत बढ़िया ज्ञानवर्धक जानकारी है

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