सवासेर गेहूं - कहानी पुरानी मगर समय के साथ समाज की तस्वीर और भयाभय हुई

प्रेमचंद की कहानी सवासेर गेहूं आप सबने पढ़ी होगी। उसमें आजसे पचास साल पुराने समाज की तस्वीर है, जिसमें साहूकारी प्रथा पीढ़ी दर पीढ़ी की गुलामी देती है। सवासेर गेहूं की वह कहानी तो प्रेमचंद जी की कल्पना थी, मगर सवासेर गेहूं के लिए बेटी की जान लेने वाले गरीब अब भी उसी तनाव और द्वंद्व में समाज की हकीकत बने हुए हैं। एक अखबार में छपी यह खबर उस पुरानी कहानी का नया चेहरा दिखाने वाली है-

बहराइच.एक किशोरी के सैम्पू खरीदने के लिए एक किलो गेहूं बेच देने से नाराज बाप के उसे कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डालने की घटना सामने आई है।अख्तरुल (12वर्ष) की मां ने उसे बचाने का प्रयास किया लेकिन आरोपी मिजान अहमद ने उसे बुरी तरह पीटा। रात में मिजान अहमद ने अपने अचेत बेटी को उठाने की कोशिश की तो उसे मरा हुआ पाया। मिजान ने रात में ही दो पड़ोसियों की मदद से अख्तरुल का शव कब्रिस्तान में दफना दिया।
सुबह उसके परिवार के सदस्यों ने अख्तरुल को गुम पाया और उसकी तलाश शुरू कर दी।अख्तरुल की मां ने ग्रामीणों की मदद से कैसरगंज थाने में एक शिकायत दर्ज कराई। कै
सरगंज के थानाध्यक्ष कपिलमुनि सिंह ने खोजबीन के बाद शव के कब्रिस्तान में होने का पता लगा लिया और उसे बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मिजान अहमद और उसके दो भतीजों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

Comments

ZEAL said…
शर्मनाक घटना ! अब बाप भी हैवान हो रहे हैं।
'उदय' said…
... uffffffff ... behad afsosjanak !!!
सुधीर जी...मामूली सी बात के लिए अपनी बेटी की पिटाई कर हत्या कर देना
निंदनीय और शर्मनाक है. ऐसा भी हो सकता है कि इस ख़बर के कुछ और पहलू
हों. और नहीं भी हो सकते. फिर भी एक बाप अपनी बेटी को इतना पीटे कि उसका
दम ही निकल जाए, इसे किसी भी पहलू के सन्दर्भ में ज़ायज नहीं ठहराया जा सकता.
इस सन्दर्भ में आपने प्रेमचंद जी की कहानी का ज़िक्र भी बिलकुल सही किया है.
@सुधीर राघव......
मगर सवासेर गेहूं के लिए बेटी की जान लेने वाले गरीब अब भी उसी तनाव और द्वंद्व में समाज की हकीकत बने हुए हैं।



सहमत हूँ .
दुखद। शर्मनाक! अफ़सोसजनक।
Pawan Rana said…
ji hai apne bilkul sahi kaha... ye khaber maine b pdi thi..ajj b aise logo kami nhi hai is dharti par... jo jaan ki kimat nhi samjhte .ye nhi jante ki apno ka pyar kitni muskil se milta h
सुधीर जी आजकल कहाँ व्यस्त हो? इतने दिनों से आपने कुछ लिखा ही नहीं।
Vijay Mishra said…
behad sarmnak bat hai...
aur sir kahan aaj kal aapke to darsan hi nhi ho rhe hai aap kabhi online bhi nhi dhikate hain...
Pradeep said…
सुधीर जी प्रणाम!
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें .....

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