सुधीर राघव
मैंने बच्चों से कहा-
मैं तुम्हें सिखाऊंगा
मेरे पास बहुत सी
अच्छी-अच्छी बाते हैं,
जब मैं तुम्हारे जितना था
मेरे माता-पिता भी मुझे
सिखाते थे
पर मैं नहीं समझ सका
उन्होंने मेरे कान खींचे
तुम भी नहीं सुनते हो
मैं तुम्हारे भी कान खींचूंगा....
मैं कान खींच रहा हूं
क्योंकि जो मैं बताता हूं
बच्चे नहीं सीख रहे हैं...
बच्चे वही सीख रहे हैं
जो मैं करता हूं...
बच्चे हमसे शब्द नहीं
जीवन जीने की कला
सीखते हैं
पर वह कला क्या हमें आती है??
सहवाग और धोनी के आपसी मतभेद
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सहवाग और धोनी को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर जीना चाहिए। एक दुसरे के खिलाफ बयानबाजी
करके खेल की भावना को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। एक निश्चित ऊँचाई तक पहुँच जान...
20 hours ago

9 comments:
अच्छी रचना , बधाई !
achhi class hai.... jeevan jeene ki kala seekhne ki behad zaroorat hai...
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bahut sundar prastuti --aabhar.
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बच्चे वही सीख रहे हैं
जो मैं करता हूं...
बच्चे हमसे शब्द नहीं
जीवन जीने की कला
सीखते हैं
पर वह कला क्या हमें आती है??
इस कविता में आपने बहुत अच्छा सवाल पुछा है ....
शायद हमे जीवन जीने की कला नहीं आती
मैं कान खींच रहा हूं
क्योंकि जो मैं बताता हूं
बच्चे नहीं सीख रहे हैं...
बच्चे वही सीख रहे हैं
जो मैं करता हूं...
सही है भाषा से ज्यादा आचरण काम करता है।
बच्चे हमसे शब्द नहीं
जीवन जीने की कला
सीखते हैं
bahut hee sargarbhit rachna ..badhayi
... shubh diwaali !!!
झकास
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Happy Diwali Sudheer ji.
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