Wednesday, October 20, 2010

दिवाली से पहले

सुधीर राघव

इस दशहरे पर
रावण बच गया
इसलिए रच रहा है
दिवाली से पहले
राम के वनवास का षड्यंत्र।

नहीं जानता
राम वन जाएगा
तभी तो रावण मरेगा,
शायद सरस्वती ऐसे ही
बुद्धि फैरती है

आखिर रावण की मां
कब तक खैर मनाएगी
क्योंकि दशहरा तो
हर साल आता है।।

पुनश्च- अगले दशहरे

फिर मिलेंगे रावण।।

10 comments:

मनोज कुमार said...

कमाल है। बहुत ही अलग और उम्दा सोच।
नहीं जानता
राम वन जाएगा
तभी तो रावण मरेगा,
शायद सरस्वती ऐसे ही
बुद्धि फैरती है
बार-बार इसे पढ रहा हूं।

saurabh said...

बहुत सही। रावण को तो एक दिन मरना ही है।

'उदय' said...

... क्या बात है !!!

दीप्ति शर्मा said...

bahut achhi rachna hai
bahut sahi

blog m aane ko aabhar
yuhi margdarsan karte rahe
dhanvad

pramod said...

बहुत ही बेहतरीन...

आमीन said...

सिर जी अब तो मार ही डालो रावण को, अगला साल तो साला बहुत लंबा हो जाएगा...

हा हा हा...

बेहतरीन रचना के लिए बधाई

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

नया नजरिया.

Anonymous said...

बेहतरीन रचना के लिए बधाई

Anonymous said...

बेहतरीन रचना के लिए बधाई

विरेन्द्र सिंह चौहान said...

मुझे भी ये रचना बहुत अच्छी लगी ..
सुधीर जी इस रचना के लिए आपको बधाई ...