Tuesday, September 14, 2010

आप भी जानें - क्या है चंडीगढ़ की सुखना झील का संकट


ऊपर चित्र में दिखाई गई यह जलीय वनस्पति सुखना झील के पानी पर तैर रही थी। यह बड़ी तेजी से बढ़ रही थी। अप्रैल माह में यह वनस्पती झील की सतह पर छा गई थी।  इस झील में सैलानी बोटिंग करते हैं। जब बोटिंग एरिया तक यह वनस्पति पहुंची तो प्रशासन जागा और मजदूर लगाकर इसको हटाने का काम शुरू किया गया। इस कंटीली वनस्पति को छूने से एलर्जी भी देखी गई। यह एक्वेटिक वीड क्या बला है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है। अभी तक इसके वेलिसनेरिया, हाइड्रीला और ब्राजील चारा वीड होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। हिन्दुस्तान के चंडीगढ़ संस्करण में १३ सितंबर को छपी खबर में पंजाब यूनिवर्सिटी की बॉटनी विभाग की प्रोफेसर डेजी बातिश ने इसके पोटामोजेटोन क्रिस्पस होने की संभावना व्यक्त की है। हालांकि उनका कहना है कि अभी इसका लैब परीक्षण होना है।






यह चित्र इस बनस्पति की एक पत्ती का है। इसके किनारे आरी के दांत जैसे तीखे और पत्ती की बीच की शिरा पर भी छोटे छोटे कांटे हैं। इन कांटों की संख्या २० से २५ के बीच हैं। हाइड्रीला की पत्तियों पर भी ऐसे कांटे होते हैं, जिनकी संख्या ११ से ३९ तक हो सकती है। मगर हाइड्रीला की पत्ती लंबाई चोड़ाई इससे कुछ कम होती है।










यह दायीं ओर का तीसरा चित्र इसके मुख्य तने का है, जिस पर थोड़ी-थोड़ी दूर पर तीन-तीन पत्तियां होती हैं। इस तने पर भी छोटे-छोटे कांटे होते हैं। इस तरह के कांटे हाइड्रीला में भी होते हैं।



क्या जेनेटिकली मॉडिफाइड बला है
यह बूटी असल में क्या है, इसका पुष्ट जवाब अभी तक नहीं मिल रहा है। अगर आपकी बॉटनी में रुचि हैं, या आप बॉटनी पढ़ाते हैं, आप इसमें मदद कर सकते हैं। क्या आपने अपने आसपास के जलाशयों में ऐसी बूटी को देखा है? यह भी संभव है कि इस जलीय खरपतवार को सुनियोजित तरके से फैलाया जा रहा हो। आखिर अमेरिका में हाइड्रीला की रोकथाम के लिए जैविक उपायों के तहत लाखों डॉलर खर्च किए जाते हैं। सुखना झील में यह खरपतवार प्रकृतिकतौर पर पैदा हुई है या जैनेटिकली मॉडीफाइड कोई बला है, अभी इस रहस्य का उत्तर तलाशना बाकी है।


....और आप नीचे के चित्र में हिन्दुस्तान के चंडीगढ़ संस्करण का १३ सितंबर का वह पूलआउट देख रहे हैं, जिसमें पर्यावरण से जुड़ी इस समस्या को गंभीरता से उठाया गया है।

8 comments:

राजभाषा हिंदी said...

राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज़्ज़त करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिन्दी की इज़्ज़त न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे

भारतेंदु और द्विवेदी ने हिन्दी की जड़ें पताल तक पहुँचा दी हैं। उन्हें उखाड़ने का दुस्साहस निश्‍चय ही भूकंप समान होगा। - शिवपूजन सहाय

हिंदी और अर्थव्यवस्था-2, राजभाषा हिन्दी पर अरुण राय की प्रस्तुति, पधारें

निर्मला कपिला said...

धन्यवाद इस जानकारी के लिये।मुद्दे तो उठते रहते हैं मगर उस पर काम भी हो। धन्यवाद।

गजेन्द्र सिंह said...

धन्यवाद इस जानकारी के लिये।

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
(प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

Virendra Singh Chauhan said...

सुधीर जी ...............
ज्ञानबर्धक आलेख .
हिन्दी दिवस पर आपका अभिनन्दन है .

Babli said...

बहुत ही बढ़िया, महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हुई! धन्यवाद!

Pawan Rana said...

acha likha h

Sonal said...

shukriya is jaankaari ke liye..

संजय भास्कर said...

सुधीर जी
.....ज्ञानबर्धक आलेख .