Saturday, September 25, 2010

छोटी खबर पर बड़ी मिसाल

कुछ लोगों को यह एक छोटी खबर लग सकती है, मगर यह लापरवाही की बड़ी मिसाल है। चंडीगढ़ के पास छतबीड़ चिड़ियाघर में घड़ियाल के पंद्रह में से चौदह बच्चे मारे गए हैं। जू प्रशासन इनकी मौत का जिम्मेदार ठहरा रहा है, एक नर घड़ियाल को। पूरी कहानी पढ़ोगे तो यह बात आपके गले से भी नहीं उतरेगी।

घड़ियाल के ये पंद्रह बच्चे सात जून को जन्में थे। घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम के तहत इनकी ब्रीडिंग की जा रही थी। काफी दिन तक ये दिखाई नहीं पड़े तो जू के अधिकारियों ने इनकी तलाश शुरू की। तलाब का सारा पानी निकाल दिया गया। उसमें बस एक ही बच्चा मिला। अधिकारियों ने तब ये सोचा कि शायद बाकी बच्चे बाड़े के रेत के टीले में जा छुपे हों। फिर रेत की खुदाई शुरू हुई। बीस सितंबर को रेत में से ग्यारह बच्चों के कंकाल मिले। तत्काल एक फारेस्ट गार्ड को निलंबित कर दिया गया। चिड़ियाघर के फील्ड डायरेक्टर चर्चिल कुमार का अखबारों में बयान आया कि इन बच्चों को नर घड़ियाल ने खा लिया होगा। हम मामले की जांच करेंगे।

नर घड़ियाल तो बेचारा अपनी सफाई दे नहीं सकता पर उस पर लगे इस आरोप को साबित करने के लिए भी कई सवालों का जवाब देना होगा। पहला तो यह कि अगर इन्हें नर घड़ियाल ने खाया होता तो इसकी संभावना बहुत कम थी कि तीन माह के इन बच्चों के कंकाल मिलते। इन सरीसृप जीवों की पाचन शक्ति काफी अच्छी होती है और छोटी अस्थियां तक पच ही जाती हैं। दूसरा सवाल यह है कि घड़ियाल संरक्षण के नियमों के तहत इन बच्चों को बड़े घड़ियालों से अलग तलाब में रखा जाना चाहिए था। इसके अलावा पानी का तापमान २६ डिग्री सेल्सियस तक नियंत्रित रखने के लिए अंडर वाटर बाल्व प्रयोग होने चाहिए थे, वे नहीं किए गए।

8 comments:

ओशो रजनीश said...

अच्छी रचना पोस्ट की है ........

यहाँ भी आये और अपनी बात कहे :-
क्यों बाँट रहे है ये छोटे शब्द समाज को ...?

राजभाषा हिंदी said...

आपकी चिंता जायज़ है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
साहित्यकार-बाबा नागार्जुन, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

आमीन said...

एक बात तो आप ने लिखी ही नहीं। क्या उस घड़ियाल ने कंकालों को रेत के नीचे दबा दिया था? या फिर ये सहारा रेगिस्तान है, जो रेत का एक टीला हवा के साथ उड़के कंकालों के ऊपर आ गया। इसकी जांच होनी चाहिए। मामला कुछ और ही निकलेगा। हो सकता है कि किसी कर्मचारी ने ही उन्हे खा लिया हो?

मेरा नया ब्लॉग भी देखिये
http://tikhatadka.blogspot.com/

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

नौकरशाही का नाश हो...

Pawan Rana said...

bhut khoob

विरेन्द्र सिंह चौहान said...

सुधीर जी ..ये घटना घोर इंसानी लापरवाही का नतीज़ा है.
आपने भी अखबारों में बंगाल में ट्रेन से टकराकर
हाथियों के मरने के बारे में पढ़ा होगा ...वो घटना भी उतनी ही शर्मनाक है.

ZEAL said...

शर्मनाक कृत्य ! घटना की पूरी जांच कर दोषियों पर उचित कार्यवाई होनी ही चाहिए।

Sonal said...

ye sab zoo wale karmchariyon ki laaparwahi hai....