महान साइंसदान स्टीफन हॉकिंग ने अपनी नई किताब ‘द ग्रैंड डिजाइन’ में स्पष्ट किया है कि इस सृष्टि का कोई सृष्टा नहीं है और भौतिकी के नियम ऐसे हैं कि शून्य से भी सृष्टि की स्वस्फूर्त उत्पत्ति संभव है। इसलिए हम सृष्टि के उस निर्माण को अपनी तर्कशक्ति से भी देख सकते हैं (भौतिकी के नियमों से)।
हालांकि हॉकिंग ने इसका विश्लेषण कैसे किया है यह तो पुस्तक के साथ जल्द ही सबके सामने आ जाएगा, मगर मुझे अस्सी के दशक के रूसी साइंसदानों की बात याद आ रही है, वे एंटी कॉस्मोस (एंटी ब्रह्माण्ड) का सिद्धांत लाए थे। उनके अनुसार सृष्टि का निर्माण शून्य से उसी प्रकार है जैसे हमारी गिनती है। शून्य दो हिस्सों में टूटा एक और माइनस एक में। फिर इस में वह एक ही जुड़ जुड़ कर पूरी गिनती और गुणा-भाग जैसे संबंध बनाकर पूरा गणित बन जाता है। वैसे ही सृष्टि आपसी संबंधों से विस्तार करती रही है। हालांकि एंटी ब्रह्माण्ड की अवधारणा कई सवालों का जवाब नहीं दे पायी। जैसे इस ब्रह्माण्ड और एंटी ब्रह्मांड के बीच ऐसा क्या है जो इन्हें आपस में मिलने से रोक रहा है। बीच में अगर कुछ नहीं है तो दोनों फिर मिलकर आकार से ऊर्जा में बदल जाएंगे। शून्य हो जाएंगे।
इस विषय को लेकर १९९५ में मैंने भी एक लेख लिखा था जो कुछ अखबारों में छपा भी था, सृष्टि निर्माण की यह अवधारणा हमारी वैदिक अवधारणा से मिलती जुलती है। शून्य जो परम ब्रह्म है, ब्रह्मा और सहांरक शिव के रूप में अभिव्यक्त होता है। क्या यह वही है, जिसे ब्रह्मांड और एंटी ब्रह्मांड कहा जा रहा है। वदों में सृष्टि के पालक के रूप में विष्णु भी हैं, इस तथ्य को भी जब तक ये साइंसदान नहीं तलाशते तब तक इनकी व्याख्या अधूरी है। इससे यह लगता है कि वेदों की व्यख्याएं पूरी तरह वैग्यानिक हैं और अब हमने अपनी समझ से उनका मानवीकरण कर दिया है, जिससे वे आसानी से समझ नहीं आतीं।
अंत में एक हल्की-फुल्की बात -
मुन्ने बदनाम हुए
फिक्सिंग तेरे लिए
बुकी मज़ीद निकला
दिल चारों का फिसला
बट्ट आमरे आसिफ
क्रिकेट कामरान हुए
फिक्सिंग तेरे लिए
मुन्ने बदनाम हुए
फिक्सिंग तेरे लिए
(यह पाकिस्तान को समर्पित)
शाहरूख खान का झूठा अभिमान
-
एक बार इंटरव्यू में फिल्म अभिनेता शाहरूख खान से पूछा गया - "धर्म के बारे में
आपका क्या विचार है?" वह बोला- "अल्ला ताला तो बस एक ही है , हाँ उसके अलावा
शरीर...
19 hours ago

7 comments:
बहुत अच्छी जानकारी देती रचना।
हिन्दी का प्रचार राष्ट्रीयता का प्रचार है।
हिंदी और अर्थव्यवस्था, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें
बहुत अच्छी जानकारी, मगर ईश्वर के आस्तित्व को नहीं नकारा जा सकता।
bhut acha lga padker aur jankari b mili
acha hi nahi bahut acha hai lekin bhagwa ke ashtitav ko nakara nahi ja sakta
sir jankari to reali bahut achchi hai lekin mai aastik insan hu bhagwan ko bhi manata hu...
jankari bahut hi achchi hai
ये जो ' मुन्ने बदनाम हुए' वाली पंक्तियाँ हैं , अच्छी लगी.वैसे इन्हें 'मुन्ने' कहकर आपने आसानी से छोड़ दिया.
अगर कुछ और बढ़िया शब्द मिल जाता तो और मज़ा आता. जो इनकी फितरत और कर्मो के हिसाब से फिट बैठता.
वैसे 'मुन्ने' शब्द इतना बेकार भी नहीं है, अगर
'मुन्नी' बदनाम हुई वाले गाने की तर्ज़ पर देखें तो .
Post a Comment