बीबीसी इंडिया ने अपने श्रोताओं और पाठकों के समक्ष यह सवाल उछाला है। हिन्दी साहित्य के नाम पर अब भी प्रतिक्रियाओं में प्रेमचंद, निराला, बच्चन और धर्मवीर भारती जैसे नाम ही लिए गए। जो आजकल लिख रहे हैं, उनके बारे में कहा गया है कि वे या तो अपने साहित्यक मित्रों या शत्रुओं के लिए लिख रहे हैं या फिर किसी पुरस्कार पाने के लिए। देश की हिन्दी पट्टी में ही आधुनिक साहित्य नहीं पढ़ा जा रहा है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पुस्तकें बहुत महंगी, ऐसे पाठकों के लिए मैत्रयी पुष्पा का जवाब था कि सिनेमा का टिकट भी महंगा है।
ऊपर जो सवाल उठाया गया है वह सचमुच गंभीर है। नया हिन्दी साहित्य क्यों नहीं पढ़ा जा रहा है। साहित्य का मतलब अगर पुस्तकों से ही है तो अब वह जरूर संकट में है। साहित्य का मतलब अगर सिनेमा और टीवी तथा इंटरनेट और अखबार (भले ही सप्ताह का एक पन्ना) भी है तो यकीन मानो कि हिन्दी साहित्य पहले से काफी मजबूत हुआ है। दुनिया की अन्य भाषाओं का साहित्य अनूदित हो कर हिन्दी में आ रहा है। वह नाटकों और फिल्मों के रूप में भी आया है। मोगली, मालगुडी डेज, नीम का पेड़, पिपली लाइव, थ्री इडीयट, बालिका वधु, लापतागंज जैसी रचनाएं किसी भी साहित्य के लिए मजूबत हस्ताक्षर और प्रयोगधर्मी हैं। अब हिन्दी इंटरनेट पर मजबूती से बढ़ रही है। ब्लाग पर चक्रधर की चक्कलस है तो आलोक पुराणिक की अगड़म-बगड़म भी।
ऐसा नहीं है कि अच्छा साहित्य नहीं लिखा जा रहा, मगर अब हिन्दी लेखक को पुस्तकीय संस्करणों तक ही नहीं बंधे रहना चाहिए, उन्हें अन्य लोकप्रिय माध्यमों की ओर रुख करना चाहिए। जितने खर्च में एक पुस्तक छपती है उतने खर्च में एक वेबसाइट शुरू की जा सकती है और उस पर लेखक जीवनभर की रचनाएं डाल सकता है। जो हिन्दी अभी एसएमएस के जरिए रोमन में पढ़ी जा रही है, वह थोड़े प्रयास से देवनागरी में भी हो सकती है।
इस पर हम हिन्दी पढ़ने, बोलने या लिखने वाले सबकी अपनी राय होगी। लेकिन बीबीस पर श्रोताओं की प्रतिक्रिया समचमुच बड़े सवाल छोड़ती है, एक बार अवश्य देखें इस लिंक पर
http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2010/08/100831_indiabol_hindi_audio.shtml
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1 day ago

4 comments:
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राष्ट्रीय एकता और विकास का आधार हिंदी ही हो सकती है।
Sudhir ji ye post bhi bahut achhi hai. AApne sahi baat likhi hai.
baat pate ki hai lekin naye lekhkon ko sire se kharij bhi nahi kiya ja sakta. hona yeh chahiye ki log padhne ki aadat daalein
आपको एवं आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !
बहुत बढ़िया ! उम्दा प्रस्तुती!
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