इसलिए आजकल एक नई मान्यता गढ़ी जा रही है कि क्रिकेट धर्म है। जहिर है जो बाजार एक-एक खिलाड़ी पर दो सौ करोड़ का दांव लगा रहा है, वह यह गारंटी भी पैदा करेगा कि यह घाटे का सौदा न बने। बाजार में जुमला उछलते ही चारण-भाट प्रशंसागीत में जुट गए। क्रिकेट धर्म है तो एक भगवान भी चाहिए, इसलिए सचिन को बीच में खींच लिया गया। खैर सचिन ने भी कभी इसका खंडन नहीं किया।
यह आईपीएल के दौरान सामने आ ही चुका है कि पैसा किस तरह क्रिकेट को चलाता है। हमारे यहां, हिन्दू मान्यता में भगवान के बारे में प्रसिद्ध है कि वह प्रेम के मोल बिकते हैं। कहा जाता है - दुर्योधन की मेवा त्यागी, साग विदुर घर खायो।। पर क्रिकेट में ऐसा नहीं है। भगवान यहां अंबानी के टीम में मिलता है। पहले खिलाड़ी खेलते थे अब वे विक रहे हैं। यह उस दौर का क्रिकेट है जब कुछ -पंडों- द्वारा उसे धर्म का दर्जा दिया जा रहा है। हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है मगर धर्म नहीं हैं। शतरंज में हम लगातार विश्व चैंपियन हैं मगर यह धर्म नहीं हैं। शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ओलंपिक में एकमात्र देश के गोल्डमेडल अर्जित करने वाले हैं, मगर वह भगवान नहीं हैं।
अब और देशों की बात करें। आस्ट्रेलिया क्रिकेट की महाशक्ति है और लंबे समय से विश्वचैम्पियन है, मगर वहां यह धर्म नहीं है। इंग्लैंड इसका जनक है, मगर वहां इसकी जगह फुटवाल के दीवाने ज्यादा हैं। उनके लिए खेल सिर्फ खेल है और धर्म नहीं है। हमारे यहां ही इसे धर्म क्यों बनाया जा रहा है। जानते हो ऐसा क्यों? सिर्फ इसलिए क्योंकि कोल्हू वहीं गाड़ा जाता है, जहां बेल हों। अगर कोल्हू को चलाने के लिए बेल ही न हों तो कोल्हू किस काम का। इस देश में पहले ही इतनी मान्यताएं हैं, पहले ही इतने झगड़े हैं। उसमें धर्म के नाम पर एक और कोल्हू नहीं गड़ने देने चाहिए। अच्छा तो यही है कि सचिन खुद खंडन करें। वह कहें कि वह भगवान नहीं है, वे उसी तरह एक अच्छे खिलाड़ी हैं, जैसे और खेलों में भी होते हैं। कोई भी बच्चा अभ्यास से कल एक अच्छा खिलाड़ी बन सकता है। सचिन जैसा या उससे भी अच्छा खिलाड़ी बन सकता है। पर भगवान कह देने का मतलब तो फुलस्टाप है। मतलब अब और कोई बच्चा सचिन नहीं बन सकता।

15 comments:
आपका आलेख गहरे विचारों से परिपूर्ण है।
असलियत में यही हो रहा है
नैतिकता क़ा पतन ,ब्लेक मनी को हवेत करने क़ा तरीका
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
Cricket dharm hai aur Footbal khelne waale 'kafir' .... ye hi saabit kar rahe hain maanyatawaadi !!!
आपने जिस भगवान को अनलकी कहा है, वह वाकई अनलकी है। यह कलयुग है और भगवान को साक्षात पाकर भी लोग उससे सबूत मांगते हैं। सबूत मिल भी जाए तो उसे कथित साईंस की थ्योरी पर परखकर किसी न किसी नई थ्योरी का नाम दे देते हैं। यह कलयुग के मानव का स्वभाव है। यदि लक सचिन के साथ होता तो आप भी उसे भगवान ही मानते। आपको बता दूं, जितना कि मैंने सुना है, भगवान जब तक जहां रहते हैं, संकट नहीं रहता। उनके किसी जगह से चले जाने के बाद ही संकट शुरू होता है। यह बात सचिन तेंदुलकर के बारे में भी सही लागू होती है। जब तक सचिन विकेट पर रहते हैं, उम्मीदें कायम रहती हैं। जब वे आउट हो जाते हैं तो उम्मीदें भी खत्म होने लगती हैं। अब तो कुछ अच्छे खिलाड़ी टीम में हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब सचिन के आउट होने पर पाकिस्तान में आतिशबाजी और भारत में मातम का माहौल बन जाता था। यह बात आपको भी पता ही होगी। यदि यकीन नहीं तो अपनी उम्र के किसी बुजुर्ग से पूछ लीजिएगा।
सचिन को भगवान बताने का अर्थ यह नहीं है कि वे एक बॉल पर 50 या 100 रन भी बना दें, क्योंकि आपके अनुसार भगवान ऐसा भी कर सकते हैं। सचिन को भगवान बताने से मतलब है कि श्री राम जी की तरह वे भी पूरी सेना के साथ लड़ते हैं। यदि हनुमान जी समुंद्र लांघकर रावण की लंका नहीं गए होते तो राम जी शायद जीत नहीं पाते। यदि अन्य वानर सेना ने अपने शत-प्रतिशत नहीं दिया होता तो राम की हालत भी वही होती जो हमारे सचिन की हुई। अकेले भगवान श्री राम भी रावण से शायद जीत नहीं पाते। भगवान श्री राम ने अपनी मर्यादा का पालन किया, उसी तरह सचिन भी खेल की मर्यादा नहीं लांघते। भगवान श्री राम जी का गुण था कि वे शांतचित रहते थे, आपने वैसा ही सचिन में भी देखा होगा। याद रखिए, सचिन को भगवान बताने का अर्थ यही है कि वे अपने युग के महान क्रिकेटर हैं।
यदि आप सचिन को बाजार के हाथों बनाया गया भगवान मानते हैं तो फिर श्री राम जी को भी कुछ लोगों ने अपने हित के लिए भगवान बनाया होगा, यह भी आपको मानना पड़ेगा। तब कुछ ऐसे लोग रहे होंगे, जो श्री राम जी को भगवान बताकर कमाई करते होंगे। श्री राम ने कभी कुछ नहीं किया होगा। अगर भगवान श्री राम 14 साल तक बनवास में रहे हैं तो इसका अर्थ यह नहीं कि वे भगवान नहीं थे या फिर घुमंतू थे। हो सकता है कि तब के कुछ कथित व्याख्यावादियों ने श्री राम जी को भी घुमंतू या फिर जंगलों में रहने वाला कहा होगा। लेकिन हिन्दू जानते हैं कि श्री राम जी क्या थे और सच क्या था। यह बात अलग है कि कांग्रेसियों और कुछ नए व्याख्यावादियों ने मिलकर इतिहास को अपने तरीके से बना डाला है। उन्होंने श्री राम जी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
कहा जाता है कि रावण ने सभी कालों को अपने वश में कर लिया था। वह श्री राम से भी ताकतवर थे। श्री राम जी ने जब अपनी जीत की कामना करते हुए यज्ञ किया तो रावण को भी आमंत्रित किया। रावण ने खुद भगवान श्री राम को जीत के लिए आशीर्वाद दिया। ऐसे में यह तो नहीं कहा जा सकता कि श्री राम जी रावण की शक्ति से घबरा गए थे। शायद कुछ व्याख्यावादी ऐसा भी कह दें। जब सुग्रीव को मारा तो कहा जाता है कि धोखे से वार किया गया था, तो क्या श्री राम जी कायर थे? नहीं ऐसा नहीं कहा जा सकता।
सचिन तेंदुलकर भी कुछ इसी तरह हैं। सचिन को अगर भगवान बनाया है तो लोगों के प्यार ने। क्रिकेट के हर फार्मेट में उन्होंने खुद को साबित किया है। यदि बाजार ने ही सचिन को भगवान बनाया होता तो सचिन हमेशा क्रिकेट टीम के कप्तान रहते और अपनी कप्तानी में ही ढेरों रिकॉर्ड बनाते। चूंकि उन्हें भी श्री राम जी कि तरह ही अपनी मर्यादाएं मालूम थीं, इसलिए ही उन्होंने कप्तानी झोड़ दी, जो टीम और इस देश के लिए हितकारी थी। यदि बाजारवाद के बल पे ही सचिन खेलते तो अब तक उनके खाते में उतने ही शतक होते, जितने उन्होंने मैच खेले हैं।
किसी की अलोचना करनी बहुत आसान है, लेकिन किसी को उत्साहित करना और किसी की प्रशंसा करना उतना ही मुश्किल। मानवीय स्वभाव ही कुछ ऐसा है। इसके अलावा एक और फैक्टर जो काम करता है, वह है उम्र का। बुजुर्गों को समझाना उतना ही मुश्किल है, जितना कि जिंदा और आजाद मेंढ़कों को तराजू के पलड़े में तोलना। वैसे मुझ जैसे चारणभाट व्याख्यावादियों और इतिहास बदलने की क्षमता रखने वालों से कैसे पार पा सकते हैं। गुस्ताखी के लिए माफी चाहूंगा। फिर मिलेंगे।
सर जी सचिन हो न हो पर आप जरूर महान हो. आपका सवाल है की सचिन ने कभी ये नहीं कहा कि वो भगवान नहीं हैं. यदि आप http://www.mid-day.com/sports/2010/feb/250210-Sachin-Tendulkar-Double-Century-World-Record.htm इस लिंक जाएँ तो आपको पता लग जायेगी कि सचिन ने khud ये बात कही है और कब कही है.. मेरा आपसे निवेदन है कि आप जरा सोच विचार के ही पोस्ट डाला करें.
I'm not God, just a human being, Sachin tells fans
By: Debasish Datta Date: 2010-02-25 Place: Gwalior
As Sachin Tendulkar made his way to the media conference after India beat South Africa in the second one-day international here last night, a group of enthusiasts yelled, "we have seen our God."
Busy signing a few autographs, Tendulkar smiled at them and said, "I'm not God. I'm just a human being."
He then told MiD DAY that despite the term used to praise him, he understood the fans' emotions and was grateful for their support. At the press conference, he was calm and as usual, thought about each word he uttered.
Hunger
He showed the kind of hunger he has when he said, "It feels good that I lasted for 50 overs, a good test of my fitness. I'd like to bat another 50 overs at some stage and see that the fitness level doesn't drop."
In the commentary area, Ravi Shastri emphasised that it was a "flawless" knock from the batting master and how it was a better innings that the 175 he scored against Australia in Hyderabad last year.
Arun Lal, the former India batsman said, "It is very difficult to play like this in gully cricket."
Even after scoring 401, Tendulkar stressed that the Indians did not get complacent. "South Africa that chased 434 against Australia so we didn't get complacent. What we did in the second half was important."
To say Tendulkar toyed with the South African bowlers would be an understatement but the Mumbai star made a huge statement with his level of consistency.
And the cricketing world could only stand and applaud.
(Published in Mid day)
मलखान जी गुस्ताकी के लिए माफ़ी चाहूँगा
आप जो उदहारण दे कर सचिन को भगवान बनाना चाहते हो ये तो बिलकुल भी फिट नहीं बैठता, रावन ने तो श्री राम जी की सीता को उठा लिया था, इसलिए उसने रावन को मारना पड़ा, लेकिन इसकी अंजली तो बिलकुल सुरक्षित है और उसके चारो तरफ सिक्यूरिटी है, तो फिर ये भगवान किसके लिए लड़ रहा है, अगर तुम इसे भगवान श्री राम जी का रूप मानते है तो फिर श्री राम जी ने रावन को मारने के लिए विभीषण का सहारा लिया था जो की विपक्ष का है, क्या सचिन भी ऐसे ही किसी बोलेर को अपनी और मिला के खेलता है, जिससे वह रावन का वध करने में सफल रहता है और 200 रन बना लेता है, मलखान जी आप तो अपने सचिन की खुद ही बदनामी करवा रहे हो, उस खिलाडी की तुलना श्री राम जी से करके!
Whether sachin is concern he is doing well but nt 4 the cause of nation, it is seen he is doing all that for own interest only. No any body can b above all that almighty. ya he is god and wht he thinks abt him is his own perception... so b in practical nt on followings......
well article, do proceed ahead.... to highlight such narrow monoply b criticised........
प्रिय आमीन तुम्हारी बात कुछ हज़म होने वाली नहीं लगती। व्यक्तिगत मान्यता को सामूहिक मान्यता में मिलाकर कॉकटेल बनाने की कोशश कर रहे हो। तुम सचिन को राम के समतुल्य मानते हो यह तुम्हारी व्यक्तिगत मान्यता है। उसे वही दर्जा देना चाहते हो जो हिन्दू समाज में राम का है। यह मान्यताओं की मिलावट है। यह ठीक वैसे ही है, जैसे खाद्यपदार्थों की मिलावट होती है। मिलावटखोर धनिये में घोड़े की सूखी लीद मिलाकर बेचते हैं। वे भी यही कहते हैं देखो यह धनिया ही है। उसे धनिए के भाव बेच भी देते हैं। राम इसलिए महान नहीं है क्योंकि वह रावण को मारता है या बाली को मारता है। राम इसलिए महान है क्योंकि उसके माध्यम से पहली बार समाज को समष्टिवाद का संदेश मिलता है। स्वार्थ और व्यक्तिवाद के बीच राम परिवार के लिए समाज कहने भर से व्यक्तिगत लाभ का त्याग करता है। वह मां के कहने पर राजगद्दी को ठोकर मारता है। समाज के कहने पर पत्नी को छोड़ देता है। विनम्र राम अपने आचरण से दुनिया को दिखाता है कि समाज बड़ा है व्यक्ति नहीं, फिर भले ही वह व्यक्ति भगवान क्यों न हो।
प्रिय आमीन तुम्हें पिछले वर्ल्डकप में भारत की हार याद होगी। उसके बाद समाज ने कहा सचिन बल्ला टांग दो। राम ने राजगद्दी त्याग दी थी, पत्नी त्याग दी थी। एक धोबी के कहने को भी उन्होंने महत्त्व दिया। राज के लिए प्रजा को इतना मान देना ही राम को महान बनाता है। दूसरी ओर सचिन अभी खेल रहे हैं। खेलेंगे तो दो चार बार आउट होंगे एकाध बार शतक भी बनाएंगे। यही उनका पिछले बीस साल का औसत है। दूसरी ओर उनसे किसी ने नहीं कहा था कि कप्तानी त्याग दो मगर उन्हें लगा कि इससे उनके व्यक्तिगत रिकार्ड बनने में लारा से पिछड़ जाने का खतरा है। इसलिए उन्होंने इस जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। -जय भगवान की।
पुनश्चः
तुम्हारी सचिन की मिड-डे की पोस्ट एक अच्छी जानकारी है। इस पर मैं यहां टप्पणी में नहीं अगली पोस्ट ही लिखना चाहूंगा।
अरे नहीं भाई..भगवान भी तो कई होते हैं.
हमारे देश मे जो भी चमत्कार करता है वो भगवान हो जाता है. सचिन ने चमत्कार किया है इसे तो आप भी मानेंगे.
बेचैन आत्मा जी, अरे नहीं, हमारे देश में चमत्कार करने वाला अब भगवान नहीं होता। अगर चमत्कार करने वाला भगवान होता तो कपिलदेव को यह दर्जा बहुत पहले मिल चुका होता। विश्वकप दिलाना किसी चमत्कार से कम नहीं था। यह काम सचिन अभी तक नहीं कर पाये हैं। चमत्कार एक और लक्ष्मण और द्रविड़ ने किया था जब फालोऑन के बाद हार के संकट को जीत में बदल दिया था, मुझे याद नहीं आ रहा कि सचिन ने उस मैच में कोई चमत्कार किया था। रही बात अब भगवान तय होने की तो वह बाजार और चारण-भाट करते हैं।
whts up next.
आलेख अच्छा लगा। असल में हमारे यहां व्यक्ति पूजा एक अजीब परंपरा है। मैं तो हतप्रभ रहता हूं जब कार्टून नेटवर्क में भी कई बार बच्चों को ऐसा ही शिक्षा दी जाती है। जाने में या अनजाने में। छोटा भीम इसका उदाहरण है। खूब लड़ाई-मार होती है। एक समय आता है जब दर्जनों लोग कुछ नहीं कर पाते और अचानक छोटा भीम आकर सबको पस्त कर देता है। बच्चे अपने बीच के किसी दादा या गुंडा टाइप के व्यक्तित्व को तलाशने लगते हैं। या इससे अलग कहें कि खेल-खेल में एक ऐसे खिलाड़ी को जो पूरी टीम को जिता दे। वह हीरो हो जाता है, बाकी या तो कुंठित या फिर उसके शागिर्द। किसी की तारीफ की जानी चाहिए, लेकिन एक ही व्यक्ति सबकुछ है यह संदेश देना तो गलत ही है। सुधीर आपके विचार से सहमत हूं।
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