साइबर गुलामी के लिए तैयार रहें

सामाजिक और आर्थिक गुलामियों के बाद अब समाज को साइबर गुलामी के नए फंदे के लिए भी तैयार रहना पड़ेगा। सामाजिक और आर्थिक गुलामियों ने तो धीरे-धीरे पांव पसारे। पूरी दुनिया को गुलाम बनाने का किसी एक का सपना अधूरा ही रहा। भले एक समय था जब ब्रिटेन का सूरज कभी अस्त नहीं होता था, मगर तब यूरोप के ही अनेक देश और तीसरी दुनिया के कुछ देश भी अपनी संप्रभुता बचाने में कामयाब रहे। ब्रिटेन ने अन्य देशों की संप्रभुता को जिस तरह एक-एक कर निगला उसमें उसे वर्षों मेहनत करनी पड़ी। मगर साइबर गुलामी एक सैकेंड में पूरी दुनिया को अपनी बेड़ियों में असहाय कर देगी। यह काम अमेरिका से होने वाला है। अमेरिका एक ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत राष्ट्रपति बराक ओबामा के हाथ में एक किल बटन होगा और इसे दबाते ही पूरी दुनिया में न तो कोई गूगल से कुछ सर्च कर पाएगा और न जीमेल और याहू से मेल हो सकेगी। अमेरिका के नेशनल इंटेलीजेंस के डायरेक्टर डेनिस ब्लेयर ने अपनी रिपोर्ट में इस पर बल दिया है। इस प्रस्ताव को प्रोटेक्टिंग साइबरस्पेस एसए नेशनल एसेट एक्ट का नाम दिया गया है।
इस तरह आपकी साइबर आजादी भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ में होगी। इससे कितने लोग प्रभावित होंगे इसका अंदाजा गूगल के इस दावे से लगाया जा सकता है कि सिर्फ उसके ही प्रतिदिन तीन अरब यूजर्स हैं। याहू और गूगल के अलावा यूट्यूब भी अमेरिका से ही संचालित होता है। इस तरह दुनिया को अब एक अन्य साइबर सेंटर की बेहद जरूरत है जो अमेरिका से बाहर हो। यह भारत और चीन या कहीं भी हो सकता है। इससे भले साइबर शीतयुद्ध जैसे हालात बनें मगर सिर्फ यह दुनिया को साइबर गुलामी के खतरे से बचा सकता है।

Comments

Vivek kumar said…
big ... problem !