सत्यम् वद धर्म चर : भगदड़ और मौत के बीच

सुधीर राघव
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हमारे सरोकार

सदैव सच बोलो और धर्म का पालन करो। तैतरीय उपनिषद का यह वैदिक वाक्य हमारी सभ्यता की रीढ़ है। सच की इसी नाव ने गुलामी के गहरे अंधेरे झंझावातों में भी हमें डूबने नहीं दिया। यूनान, मिस्र और रोम की प्राचीन सभ्यताएं या तो मिट गईं या बदल गईं, मगर हम अब भी सीना ताने उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए जरूरी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा हमें हमारे धर्मों और धर्मशास्त्रों से मिलता रहा है।
धर्मों और सम्प्रदायों के टकराव भी हमने झेले हैं, मगर सत्य से हमारी आस्था कभी नहीं डिगी। सुबह-सुबह पहली सूचना मिली कि डेरा सच्चा सौदा में भगदड़ मच गई है। स्थानीय संवाददाता से बात की गई तो पता चला कि पांच महिलाओं की मौत हो गई है। घायलों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती है। भगदड़ वीरवार रात करीब 10-11 बजे के आसपास हुई। घटना का पता सुबह तब चला, जब कुछ लोग तीन शव लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। उसके बाद पत्रकार डेरे के ओर दौड़े घायलों को अंदर ही स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय डेरे के अनुयायी जिस सेवा भाव से काम करते हैं, वह किसी से छिपा नहीं है। इसलिए यहां भी कुछ प्रशासन के भरोसे नहीं था। यही वजह थी कि सुबह तक पत्रकार इस सूचना से अंजान थे। पुलिस के बड़े अफसर भी सुबह ही डेरे पहुंचे। सुबह सबके पास बस अटकलें ही थीं।
स्थिति जानने के लिए डेरे के प्रवक्ता पवन इन्सां से फोन पर संपर्क किया गया। उनका कहना था कि नियमित कार्यक्रम के अनुरूप ही डेरा श्रद्धालु सत्संग के बाद लंगर छककर निकले तो आंधी का गुबार आने से महिलाओं में भगदड़ मच गई। इस वजह से पांच महिलाओं की मौत हो गई। तीन-चार को मामूली चोट आई है। यह एक दुखद घटना है।
डेरा सिर्फ अनुयायियों के सेवा भाव ही नहीं अनुशासन के लिए भी जाना जाता है। भगदड़ कहां मची, इसे लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं। पहली सूचना यह थी कि डेरे के लंगर हाल में भगदड़ मची। एक अनुयायी का कहना था कि भगदड़ डेरे से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर टैक्सी स्टैंड के पास मची है। बाद में प्रशासन की ओर से बताया गया कि भगदड़ डेरे के गेट नंबर 3 के बाहर हुई। हादसे में मारी गई बठिंडा की महिला कमला के बेटे शंकर लाल का कहना था कि भगदड़ कहां हुई, वह यह तो नहीं बता सकता, मुझे बस यह पता है कि मेरी मां इस भगदड़ में मर गई है।
मरने वालों और घायलों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आईं। राज्य सरकार ने मरने वालों के लिए मुआवजा तो घोषित कर दिया है मगर ऐसे स्थानों पर जहां एक लाख के करीब लोग जुट रहे हों, वहां प्रशासन व्यवस्था पूरी तरह संबंधित संस्थान के ही भरोसे नहीं छोड़ सकता। इस के बारे में कुछ सोचा जाना चाहिए।
भले ही आज हम सूचनाएं कुछ ही मिनटों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सक्षम हों, मगर इनकी साख इनके सच होने से ही जुड़ी है। इस घटना के संदर्भ में भी हम विश्वास करते हैं कि सभी पक्ष सच कह रहे हैं और धर्म का पालन कर रहे हैं।

(1 मई 2010 को हिन्दुस्तान चंडीगढ़ में प्रकाशित)

Comments

ashwani said…
badiya likha h sir g.

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