इक बाबा नानक सी.. पंजाब में नया विवाद

आजकल पूरे पंजाब में पेशेवर गायक बब्बू मान का गीत इक बाबा नानक सी...चर्चा में है। चर्चा ऐसी कि यह लोकगीत सा बच्चे-बूढ़ों की जुबान पर है और एक नया मुहावरा बन गया है। इस गीत में जगह-जगह पनपे गुरुओं और डेरावाद को निशाना बनाया गया है। इसलिए इसकी आलोचना भी खूब हो रही है। खासकर धर्म प्रचारकों ने इसे अपने ऊपर सीधा प्रहार माना है और ऐसे गायकों को कंजरियां नचाने वाले और नशाखोरों को बढावा देने वाला तक करार दिया है। खासकर बाबा रणजीत सिहं ढडरियांवाले और प्रसिद्ध ढाडी प्रचारक ज्ञानी तरसेम सिंह मोरांवालियां ने जो खरी-खरी बातें अपनी प्रचारसभाओं में कही हैं उनकी क्लिपिंग यू-ट्यूब पर भी उपलब्ध है। मामला यहीं नहीं रुका है गीत की तरफदारी करने वालों ने भी अपने तर्क की क्लीपिंग डाल दी हैं। यू-ट्यूब पर इक बाबा नानक सी डालते ही यह जखीरा खुल जाता है। चर्चा इतनी है तो गीत में भी कुछ जरूर है। धर्म के नाम पर कुछ गलत लोग भी जिस तरह दुकानदारी कर रहे हैं गीत में उसीको निशाना बनाया गया है, इसलिए गीत ध्यान खींचता है। गीत कुछ इस तरह है (अनुवाद के साथ)

इक बाबा नानक सी, बई जिहने तुर के दुनिया गाहती।
(अनुवाद-एक बाबा नानक थे, भाई जिन्होंने पैदल ही पूरी दुनिया नाप दी। (वैसे पंजाबी में गाहती का अर्थ खेत जुताई है)

इक आजकल दे बाबे ने, बत्ती लाल गड्डी ते ला ती।
(अनुवाद- एक आजकल के बाबा लोग हैं, जिन्होंने अपनी गाड़ी पर लाल बत्ती लगा रखी है)

कारसेवा दे नां ते मंगदे रसद नोटां दी थेली
(अनुवाद-ये लोग कार सेवा के नाम पर रसद के रूप में नोटों की थैली ही मांगते हैं)

मैं सुनैया बाबे ने आजकल काली ऑडी ले ली।
(अनुवाद-मैंने सुना है कि आजकल बाबा ने काली ऑडी (कार) ले ली है) (इस गीत में काली ऑडी की जगह बाद में महंगी गाड़ी शब्द कर दिया गया। क्योंकि काली ऑडी एक बाबा के पास थी)

इन अनपढ़ बीबीयां ने बंदे गल रब दी तख्ती पाती।
(अनुवाद-इन अनपढ़ महिलाओं (अनुयायी) ने आदमी के गले में भगवान की तख्ती डाल दी है)

छोटी जही गल्लां उत्ते हो जांदे दंगे लग दियां अग्गां।
(अनुवाद-छोटी सी बात पर दंगे हो जाते हैं, आगजनी की जाती है)

कोई बंदा सेफ नहीं, हाय राह जांदे लत्थन पग्गां।
(अनुवाद-कोई व्यक्ति सुरक्षित नहीं, हाय, राह चलते लोगों की पगड़ी उतर जाती है अर्थात इज्जत भी सुरक्षित नहीं)

येह गातर धर्मा दी किसी दी पच्छ के तुर जाए छाती
(अनुवाद-ये धर्म की कटार है, मजाल है किसी की छाती बिने छिले रह जाए)

ले ले दो चार ढोलकी पांच सत्त चिमटे रख ले नाले
(अनुवाद-दो चार ढोलकियां ले लो और साथ ही पांच-सात चिमटे रखलो)

बीबी अते वीआईपी घुम्मनगे चात्थों पैर द्वाले
(अनुवाद-फिर देखना महिलाएं और बीआईपी चारों पहर आपके चारों ओर घूमेंगे)

आसी बड़े महान हां, किसी ने झूठी फूंक छकाती
(अनुवाद-हम बड़े महान हैं, किसी ने झूठी हवा बनादी। - वैसे छकाने का अर्थ खिलाने से है)

काहनू टप्पे सिट्टें जाके, रखके बाजा तू भी गा ले
(अनुवाद-खेत में जाकर तू क्यों फावड़ा-कस्सी चलाता है, एक बाजा रख और गाना शुरू कर)

तेरा बाग फल गया जा सेंटर बिच्च कुल्ली पा ले
(अनुवाद- तेरा बाग में अब फल आ गए हैं, जा केंद्र (सरकार) में झौंपड़ी पा ले अर्थात धर्मों की राजनीति करने का जो तुम्हारा मकसद था वह सफल हो गया है, अब तुम केंद्र सरकार में जाकर अपनी जगह पक्की कर लो )

रीलां हुण बिकनियां नहीं शुरू कर खेती गायक साथी।
(अनुवाद-अब गीतों की कैसेट-रीलें नहीं बिकेंगी, गायक साथी अब तू खेती करना शुरू कर दे।)

यह देखा गया है कि पंजाब में जब भी कोई बहस छिड़ती है तो उसमें वैचारिक मुद्दे पीछे छूटने लगते हैं और ज्यों-ज्यों लोग उसमें जुड़ते जाते हैं प्यार और नफरत के सीधे-सीधे दो धड़े बन जाते हैं। महौल कड़ुवा होता जाता है और खून-खराबे की बात भी की जाती है। अब भी वही हो रहा है, रोडे-भोडे (मोने- जो केश नहीं रखते) कहा जा रहा है तो जवाब में मोनों का महत्त्व पूहला को गड्डी चाढ़ने वाली बात कह कर दिया जा रहा है। निहंग प्रमुख बाबा पूहला आतंकवाद के दौर में पंजाब पुलिस के साथ रहे, उनकी सूचनाओं पर बहुत से आतंकवादी मारे गए थे। पंजाब में आतंकवाद काबू में आने के बाद में उन पर कई आपराधिक मामले दर्ज हुए, वह जेल में बंद थे। बादल सरकार के समय उन्हें पिछले साल जेल में ही जिंदा जला दिया गया, इससे उनकी मौत हो गई। यह विवाद किस दिशा में जाता है फिलहाल वक्त ही बताएगा। हालांकि बब्बू मान ने गीत पर सफाई देकर कि यह किसी एक को निशाना बनाने के लिए नहीं है, मैंने तो आम बात कही है, मामले को ठंडा करने की कोशिश की मगर जो निशाना बने हैं उनकी नाराजगी कायम है।

Comments

जब लोग अपनी आस्था को दूसरे की आस्था से बड़ा बताने लगते हैं तभी विवाद उत्पन्न होना शुरू हो जाते हैं. पिछले दिनों गुरु गोविन्द सिंह जैसी पोशाक पहनने से विवाद खड़ा हो गया. यदि गुरु महाराज इस समय होते तो क्या वह स्वयं तलवार लेकर सिर उड़ाने खड़े हो जाते. नहीं न. इसलिये क्योंकि पोशाक पहनने से कोई गुरु महाराज के बराबर नहीं हो जाता. लोगों ने धन्धा बना लिया है विवाद उत्पन्न करने का और बाद में इसका राजनीतिक फायदा उठाने का.
गीत में मुझे कोई बुराई नजर नहीं आई. और मैं तो यह भी कहता हूं कि जो भी धर्मगुरू है उसकी अच्छी बातों को ग्रहण करें, इसमें क्या बुराई है. सत्य तो देर-सवेर सामने आता ही है.
Vivek kumar said…
translation of the song is relay nice and the issue is also serious. very good post sir...
वदिया.... वदिया सर जी

तुम्हारे बताने के बाद मैने ये गीत सुना और
मज़ा आ गया..... मैने दोनों बाबों की प्रतिक्रियाएं भी सुनीं और मज़ा आ गया।
वैसे इस शानदार गीत के लिए बब्बू मान बधाई का पात्र है.... और हमें इसकी जानकारी देने के लिए तुम
ashwani said…
wah.......sir bahut badiya. gane m to koi kharabi nahi h. asal m sachi bat pr hungama to hota h. apne b pure gane ko translate kr ke rang hi jama diya.
आमीन said…
aapne bilkul sahi kaha.. Babbu maan sahi hain.
N.Ram, Shimla said…
ek hi baat kah sakte hain...



pakad lee nabaj...
बाबयां दी फौज, करेगी मौज।
बिगड़ जाए गर इन का मूड
मुश्किल में पड़ जाती है कुर्सी
न्यूजर्सी तक पावर बढ़ाई
पब्लिक, नेता ते छड्डो
अजकल रब दी वी है शामत आई।
सर आपकी पोस्ट लाजवाब है। अब इनका इलाज करने का वक्त आ गया है।
kulwant Happy said…
बिल्कुल सही और स्टीक लिखा है। नवम्बर में मैं पंजाब में ही था। बच्चे बच्चे की जुबाँ पर उक्त गीत था, जितनी प्रसिद्धी इस गीत को मिली, शायद ही बब्बू मान के किसे अन्य गीत मिली हो गई।
वैसे इस गीत को रिलीज करने के पीछे भी बहुत बड़ी सियासत है। जब इस कैसेट को रिलीज किया गया, तब वो संत खुद के नए गुरुद्वारे का उद्घघाटन करन वाले थे, जिसको आधार बनाकर लिखा गया। वैसे तो पूरा खरा सच है।

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