नववर्ष मंगलमय हो

-सुधीर राघव

पुराने साल के साथ
नई साल की नई तारीख को
क्या हम पुराने सपनों का बोझ भी विदा कर पाते हैं
पुराने सपने हकीकत बन कर
कभी भी आ सकते हैं
अपना हिसाब चुकता करने

यकीन न हो तो राठौर से पूछना
उन्नीस साल पहले आनंद प्रकाश और
उनकी बेटी अराधना ने देखा था
रुचिका के लिए न्याय का सपना
ताकत के गरूर में राठौर ने तब
उड़ाई होगी इस सपने की खिल्ली

पर सपने तो सपने होते हैं
हकीकत बनकर कभी भी आ सकते हैं
हिसाब मांगने।
इसलिए बीते साल में जो आपके सपने सच नहीं हुए
उनके लिए हताश मत होना
और नए साल में नए सपने भी जरूर देखना।

(30-12-2009)

Comments

आमीन said…
bahut achha likha aapne
badhai
हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।
मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

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