जन्माष्टमी पर

कान्हा अब तुम्हारी गीता
से ज्यादा उस गीता को लोग जानते हैं
जो सीता के साथ डबल रोल में आई
और एक पूरी पीढ़ी के लिए ड्रीम गर्ल बनी
कान्हा तुमने कर्म की जो परिभाषा दी
वह हमने अपने बच्चों के लिए रख छोड़ी है
जैसे हमें मिली विरासत में
यह अब उन पर निर्भर है
कि वे पढ़कर उसे अगली पीढ़ी के लिए छोड़ देंगे
या गुनेंगे भी
तुमने हरियाना की धरती पर ही
प्रेम का भी संदेश दिया
हम हैं कि वेदपाल की हत्या पर
खाप में बैठकर अपनी नाक को
कुछ और ऊंचा महसूस करते हैं
सुनते हो कान्हा, तुम्हारे बच्चे अब बड़े हो गए हैं
इन्हें अब नए पाठ की जरूरत है
ऐसा पाठ जो फिर से
सबको नेक इन्सान बना दे।
-सुधीर राघव

Comments

bahut sunder vichar
kanha ko dharti per aana hi hoga
Bhaskar said…
heloo sudhir ji how r u
your though & writing was so good

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