क्या धरती पर जीवन बसाने के दो अलग-अलग मिशन थे

-सुधीर राघव
हालंकि चारों वेदों से भी इसके पर्याप्त संकेत मिलते हैं कि जीवन किसी अन्य ग्रह से आया मगर यहां हमने चर्चा पुराणों से शुरू की है। पुराण में यह कथा के रूप में हैं, और विस्तार से है। इनसे इन्हें समझने में काफी आसानी होती है। अभी तक हमने नीचे के लेखों में स्कंद और पद्म पुराण के क्रमशः समुद्र मंथन और सृष्टि निर्माण के खंडों को इस परिपेक्ष्य में देखा। पद्म पुराण में हमने पढ़ा कि ब्रह्मा ने विष्णु से जलमें डूबी धरती पर सृष्टि बसाने को कहा। वह वामन रूप में आए। अब वामन पुराण के अध्ययन में यह स्पष्ट होता है कि दो अलग-अलग समुदाय इस काम में जुटे थे और संभवतः विष्णु और देवताओं से पहले दूसरे समुदाय जिसे राक्षस या दैत्य कहा गया ने सफलता पूर्वक धरती पर लैंड किया होगा। उन्होंने यहां अपनी सत्ता स्थापित की। यह सत्ता तीन पीढियों तक चली तब विष्णु अवतरित हुए। विष्णु जब पहुंचे तब प्रह्लाद के पोत्र बलि धरती पर राक्षसों का नेतृत्व कर रहे थे। (स्कंद पुराण भी इसकी पुष्टि करता है) इस उपाख्यान के अन्तर्गत राजा बलि का वैभवपूर्ण वर्णन करते हुए उसकी दानशीलता की प्रशंसा की गई है। उपाख्यान इस प्रकार है कि एक बार राजा बलि ने देवताओं पर चढ़ाई करके इन्द्रलोक पर अधिकार कर लिया। उसके दान के चर्चे सर्वत्र होने लगे। तब विष्णु वामन अंगुल का वेश धारण करके राजा बलि से दान मांगने जा पहुंचे। दैत्यों के गुरू शुक्राचार्य ने बलि को सचेत किया कि तेरे द्वार पर दान मांगने स्वयं विष्णु भगवान पधारे है। उन्हे दान मत दे बैठनां परन्तु राजा बलि उनकी बात नहीं माना। उसने इसे अपना सौभाग्य समझा कि भगवान उसके द्वार पर भिक्षा मांगने आए हैं। तब विष्णु ने बलि से तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने संकल्प करके भूमि दान कर दी। तब विष्णु ने अपना विराट रूप धारण करके दो पगों में तीनों लोक नाप लिया और तीसरा पग राजा बलि के सिर पर रखकर उसे पाताल भेज दिया।
इस कथा से यह संकेत मिलता है कि विष्णु ने यहां पहले से बसे दैत्य समाज को धरती छोड़ कर किसी अन्य ग्रह यानी पाताल लोक पर जाने के लिए मना लिया। उस समय में हो सकता है कि लोक शब्द उन ग्रहों के लिए हो, जिन पर जीवन बसता हो या वसने की संभावना हो। यहां तीन पग में धरती नापने का भी विशेष अर्थ है, जिसकी चर्चा अगले लेख में की जाएगी।

Comments

Nirmla Kapila said…
बहुत सुन्दर प्रयास है कि हमे घर बैठे बिठाये अपने वेद पुराणों से अवगत करवा रहे हैं आज कल दिनेश राये दिवेदी जी भी तत्व मिमांसा पर लिख रहे हैं अच्छा लगता है कि हमे इतनी बहुमुक्य जानकारियाँ मिल रही हैं बहुत बहुत धन्यवाद्
बहुत बढ़िया प्रयास!
दीपक भारतदीप
सर आपने तो जिज्ञासा बढा दी है अब..जल्दी से अगला अंक पोस्ट करो
anupam mishra said…
ज्ञान बांटने के लिए शुक्रिया...
vijay mishra said…
sir mujhe aapake agale lekh ka intzar hai taki aage bhi kuchh sankaye door hon.....

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