समुद्र मंथन के दौरान ही मिला ग्रहण गणना का ज्ञान

-सुधीर राघव
स्कंद पुराण की समुद्र मंथन की कथा में मैंने बताया कि यह किस तरह एक अंतरिक्ष यान की क्रेश लेंडिंग की कथा लगती है। यान के जब सभी नौ चेम्बर खोल कर चीजें निकाल ली गईं (नौ चेम्बर यहां नवरत्न से हैं) तो अंत धन्वतंरी जिस अमृत कलश को लेकर निकले, उसे पाने को लेकर देवताओं और असुरों का झगड़ा शुरू हुआ। अमृत असल में दूसरे ग्रह से देवताओं को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए भेजा गया, द्रव्य हो। यह भी संभव है कि उस दौरान क्रेश लेंडिंग के कारणों को लेकर चर्चा शुरू हुई हो, जिसे लेकर भी झगड़ा हुआ हो। स्कंद पुराण में आचार्य गर्ग के हवाले से यह कहा जाता है कि इस समय सूर्य, बुध, चंद्र, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि केंद्र में युक्त हैं और इसे गोमन्त नामक मुहुर्त का नाम दिया गया। इससे तय है कि यह घटना अमावस्या के दिन हुई हो। ऐसे भी संकेत लगते हैं कि उस दिन सूर्य ग्रहण रहा हो। इन सभी ग्रहों का अध्ययन करने वाले वैग्यानिक भी इन्हीं नामों से शायद पुकारे जाते थे। क्रेश लैंडिग आक्षेप इंद्र पर लगाया गया। यह संकेत हमे मंदराचल के इस कथन से मिलता है कि इंद्र ने वज्र से मेरे पंख काट दिए। जाहिर है, इसका स्पष्टिकरण दिया गया होगा। अचानक ग्रहण की वजह से राहु का आकलन करने वाला इसका अनुमान नहीं लगा पाया होगा। इसलिए उस राक्षस राहु को सूर्य और चंद्र ने अर्थात इन दोनों ग्रहों का अध्य्यन करने वाले वैग्यानिकों ने देवताओं की कतार से निकालने के लिए विष्णु को कहा होगा। जाहिर है कि यह ग्रहण सूर्य, चंद्र और केतु (यानी चंद्र की छाया) के एक राशि में होने से हुआ। जबकि केतु का तब तक ग्यान नहीं था। राहू इन सभी ग्रहों के ठीक सामने वाली राशि में रहा होगा। ऐसे में वे सूर्य ग्रहण का उचित आकलन नहीं कर पाये होंगे। तब विष्णु ने जो स्त्री रूप धारण कर झगड़े को सुलझाने का प्रयास कर रहे थे, राहु के विभाग के दो टुकड़े कर उसमें केतु की भी नियुक्ति कर दी हो। इसीके बाद पृथ्वी पर सूर्य और चंद्र ग्रहण की गणनाओं का सही ग्यान भारत के पास आया। ऋग्वेद में भी इसका उल्लेख आता है कि अचि मुनि के परिवार के पास यह ग्यान था। एक अनुमान के अनुसार ईसा से चार हजार वर्ष पहले भारतीयों को यह ग्यान हो गया था कि सूर्य और चंद्र ग्रहण कब पड़ते हैं। संभव है कि स्कंद पुराण को इस घटना के काफी समय बाद लिपिबद्ध किया गया या उसमें इस घटना को भी पूर्वजों के सुने के अनुरूप रखा गया, इसलिए वर्णन कुछ अतिश्योक्तिपूर्ण हो।

Comments

अति दिलचस्प तथ्य
kewal tiwari said…
sudhir bhai is shuruaat per meine ek comment diya tha lekin mujhe ab dikh naih rahi. mein usko dekhkar kuchh aur likhna chahta tha. khair is comment ko dekhta hoon yeh bhi poora nahin show karega to samjhoonga shayad mujhe comment submitt karna nahin aata.

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