पद्म पुराण में मिलते हैं मानव के किसी अन्य ग्रह से आने के संकेत

-सुधीर राघव
धरती पर मानव जीवन क्या किसी अन्य ग्रह से आया। इसके कुछ -हलके संकेत पुराणों में मिलते हैं। इस लिहाज से पद्म पुराण में सृष्टि के निर्माण की कथा भीष्म और पुलस्त्य के संवाद के हवाले से मिलती है। जाहिर है कि यह संवाद पृथ्वी पर जीवन बसने के काफी बाद का है, इसमें भीष्म खुद पुलिस्त्य से पूछते हैं कि आप यह बताने का कष्ट करें कि सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई ? इस पर पुलस्त्य जी ने कहा कि बहुत पहले कल्प के अन्त में लोक को शून्य और पृथ्वी को जल में डूबी हुई देखकर ब्रह्मा ने विष्णु का स्मरण किया। (इससे प्रतीत होता है कि ब्रह्मा किसी अन्य लोक या ग्रह पर रहे होंगे। यहां स्मरण किया का अर्थ काम सौंपा भी हो सकता है। इस त्रिमूर्ति में ब्रह्मा का नाम पहले आता है, इससे यह आभास भी होता है कि ब्रह्मा उस लोक के प्रमुख रहे होंगे और उन्होंने विष्णु को धरती पर मानव वस्ती बसाने का काम सौंपा हो। धरती पर चूंकि सारा काम विष्णु ने ही किया इसलिए यहां उनका महत्त्व बढ़ गया, उन्हें कई रूपों में पूजा जाता है) आगे की कथा-
तब विष्णु वराह का रूप धारण करके ( हो सकता है कि यह उनका स्पेस सूट और कोई छोटा यान हो) जल में डूबी हुई पृथ्वी के पास गए। भगवान वराह ने भयंकर गर्जन किया और पृथ्वी पर अनेक द्वीप तथा पहाड़ों की रचना कर दी। (इस वर्णन से लगता है कि दूसरे ग्रह से देखकर यह माना गया होगा कि यह सिर्फ जल में डूबी है, यही समझकर ब्रह्मा जी ने इसे जीवन बसाने के लिए उपयुक्त पाया होगा, मगर जब विष्णु यहां पहुंचे तो उन्होंने पाया कि यहां द्वीप तथा पहाड़ हैं और गर्जना का संभवतः अर्थ यहां मौसम बदलता रहता है या किसी ज्वालामुखी को भी उन्होंने फटते देखा हो सकता है) इसके बाद उन्होंने ब्रह्मा से प्राकृत, वैकृत और नवविध सृष्टि की रचना करने के लिए कहा। (अर्थात उन्होंने ब्रह्मा जी को अपनी रिपोर्ट भेजी होगी, इस-इस प्रजाति के लिए यह अनुकूल है) तब ब्रह्मा के मुख से सत्वगुण, वक्ष और जंघाओं से रजोगुण और पैरों से केवल तमोगुण से युक्त प्रजा-सृष्टि की उत्पत्ति हुई। यही प्रजा ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र कहलाई। (यह बात संभवतः पुलस्त्य ने अपने समय के हिसाब से भीष्म को समझाई हो, संभव नहीं है कि यह उस समय ऐसा रहा हो) इसके बाद यज्ञ की उत्पत्ति और निष्पत्ति के लिए उन्होंने मनुष्य को चार वर्गों में विभाजित कर दिया। यज्ञों से देवता लोग प्रसन्न और तृप्त होते हैं और मनुष्य भी इसी जीवन में स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति करते हैं। यज्ञ में सिद्धि देने के लिए वर्ण-व्यवस्था बनाई गई है। ब्रह्मा ने यज्ञादि कर्म करने की सृष्टि से सांसारिक व्यवस्था की और उसके बाद उत्तम रूप से निवास करने की सृष्टि की है। फिर उन्होंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य शूद्रों के लिए प्रजापति के इन्द्र के मरुत के और गन्धर्व के लोक बनाए और उन्होंने अनेक प्रकार के अन्धकार और दु:खों को तथा अनेक नरकों को बनाया। जिससे दुष्ट व्यक्ति को दण्ड दिया जा सके। (संभवतः ब्रह्मा जी ने धरती पर बसने वालों के लिए कुछ नियम बनाए हों) इसके बाद ब्रह्मा ने अपने ही समान नौ-भृगु, पुलस्त्य पुलह, ऋतु, अंगिरा, मरीचि, दक्ष, अत्रि और वसिष्ठ मानव पुत्रों की रचना की। (ये वे लोग होंगे जिन्हें पहली बार धरती पर बसने के लिए तैयार किया गया होगा) पुराणों में इन नौ ब्रह्मा-पुत्रों को ‘ब्रह्म आत्मा वै जायते पुत्र:’ ही कहा गया है। ब्रह्मा ने सर्वप्रथम जिन चार-सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार पुत्रों का सृजन किया, लोक में आसक्त नहीं हुए और उन्होंने सृष्टि रचना के कार्य में कोई रुचि नहीं ली। (इससे यह संकेत मिलता है कि मानव को धरती पर बसाने से इस प्रोजेक्ट के कुछ अधिकारी जिन्हें उन्होंने नियुक्त किया था, वे सहमत न रहे हों, उनका मानना हो कि हम इसी ग्रह पर ठीक हैं, हमारी अपनी जिंदगी के लिए, वहां पता नहीं क्या हो) इन वीतराग महात्माओं के इस निरपेक्ष व्यवहार पर ब्रह्मा के मुख से त्रिलोकी को दग्ध करने वाला महान क्रोध उत्पन्न हुआ। ब्रह्मा के उस क्रोध से एक प्रचण्ड ज्योति ने जन्म लिया। उस समय क्रोध से जलते ब्रह्मा के मस्तक से अर्धनारीश्वर रुद्र उत्पन्न हुआ। ब्रह्मा ने उस अर्ध-नारीश्वर रुद्र को स्त्री और पुरुष दो भागों में विभक्त कर दिया। (संभवतः ब्रह्मा इस बात पर क्रोधित हुए हों और उन्होंने धरती पर भेजने के लिए कोई क्लोन तैयार किया हो, एक स्त्रीपुरुष को राजी किया हो। यह बताने के लिए कि अगर ये सही सलामत पहुंच जाते हैं तो बाकी लोग भी जा सकेंगे) यह सही सलामत पहुंचे। उसके बाद अन्य लोग भेजे गए और उन्ही में से एक यान की क्रेश लैंडिंग भी हुई जिसका संकेत समुद्र मंथन की घटना से मिलता है।

Comments

Apne puraano ko vigaanik drishti se dekhne ki jaroorat hai.......
पुराणो को विगयानिक दृष्टिकोण से बताना सराहनीय कदम है
अच्छी जानकारी है।आभार।
आमीन said…
bahut hi badhiya hai sir, bahut nice.. thanks
दिल को खुश रखने को ग़ालिब खयाल अच्छा है।
Nirmla Kapila said…
िअपने पुराण और वेदों मे तो सभी वैग्यानिक दृष्टी से ही लिखा गया है विदेशी इन से लाभ उठा गये मगर हम ही सोये रहते हैं बहुत बडिया प्रयास बधाई

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